ब्रेकिंग
भाजपा समर्थित नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रजीत महेंद्र सिंह खनूजा के कार्य और व्यवहार से असंतुष्ट होकर 12 ... समाजसेवी स्व. अशोक (सर) विश्वकर्मा की पुण्यतिथि पर अस्पताल में बांटे फल और बिस्किट, किया वृक्षारोपण वेयर हाउस एसोसिएशन दल ने समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक से मुलाकात मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब परिवार के लिए वरदान साबित हो रही पूर्व मंत्री पटेल मुख्यमंत्र... सुपरवाइजर सोनी की सेवानिवृत्ति पर गुलदस्ता भेंट कर दी विदाई नगरीय क्षेत्रों में बेहतर सेवाओं का विस्तार कर रही हमारी सरकार पूर्व मंत्री पटेल 76 वे गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में हुआ भारत माता प्रतिमा का अनावरण कमिश्नर तिवारी ने निर्माणाधीन सी एम राइज स्कूल भवन का किया निरीक्षण दानापुर पुणे बरौनी एक्सप्रेस ट्रेनों के पुनः स्टॉपेज केंद्रीय मंत्री उइके पूर्व मंत्री पटेल का हृदय ... खंडवा जिले की भामगढ़ मस्जिद में बरसों तक इमाम रहे इकबाल अली के पुत्र आले मुस्तफा चिश्ती ने सनातन धर्...

 
 
 
 

फर्जी हस्‍ताक्षर से बैंक से लिया 28 लाख का लोन, एक महिला सहित दो आरोपित गिरफ्तार

बुरहानपुर/धाबा। कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर अधिसूचित क्षेत्र की अनुमति बनाने और उसके आधार पर एयू बैंक से 28 लाख रुपये का ऋण लेने के मामले में पुलिस ने एक महिला सहित दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

इनमें बैंक का कर्मचारी बंडू पुत्र सहदेव कामले निवासी शिवाजी नगर लालबाग और बैंक में जमीन बंधक रखकर ऋण लेने वाली सीमा पत्नी भगवान शिवहरे निवासी तुकईथड़ खकनार शामिल हैं। फर्जी अनुमति तैयार करने के लिए सील तैयार करने वाला लोकेश निवासी लालबाग फरार हो गया है।

पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस अधीक्षक राहुल लोढ़ा ने बताया कि बैंक और पंजीयन विभाग से नवंबर से अब तक के ऐसे सभी प्रकरणों की जानकारी मांगी गई है, जिनमें कलेक्टर की अनुमति लगा कर ऋण हासिल किया गया है। पुलिस ने सीमा शिवहरे के बैंक खाते को भी फ्रीज करा दिया है। उन्होंने इस मामले में सेवा प्रदाताओं की किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार किया है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान ऐसे और कई मामले सामने आ सकते हैं।

बंडू ने लिए थे बीस हजार रुपये

सीमा शिवहरे ने सितंबर 2022 में तुकईथड़ स्थित अपनी जमीन बैंक में बंधक रख कर ऋण लेने के लिए बैंक से संपर्क किया था। खकनार विकासखंड आदिवासी होने के कारण वहां की प्रत्येक भूमि के क्रय-विक्रय अथवा बंधक रखने के लिए कलेक्टर की अनुमति जरूरी होती है। यह अनुमति नहीं होने के कारण उसका ऋण प्रकरण अटक गया था। बैंक के कर्मचारी बंडू ने सीमा से बीस हजार रुपये लेकर यह अनुमति दिलाने का ठेका कर लिया था।

उसने दूसरी महिला के लिए पूर्व में जारी अनुमति में सीमा का नाम लिख कर और फर्जी सील व साइन करके अनुमति दे दी। बैंक ने इसके आधार पर उसे 28 लाख का ऋण भी दे दिया था। सेवा प्रदाना प्रवीण महाजन को अनुमति संदेहास्पद लगी तो उसने संंबंधित अधिकारी को इसकी सूचना दी। जिसके बाद हुई जांच में फर्जीवाड़े का भांडाफोड़ हो गया।

Leave A Reply

Your email address will not be published.